#कविता ज़िंदगी, #नज़्म नसीहत उम्र की मोहताज़ नहीं होती : सावन अक्सर छलावे को हम हक़ीक़त मान बैठते है, जो नहीं हैं क़िस्मत में उसे अपना मान बैठते है गया, जो नहीं था अपना, उसके बारे में क्या जिरह करना अब हक़ीक़त को ही अ 23 जुलाई शेयर करें