नसीहत उम्र की मोहताज़ नहीं होती : सावन
अक्सर छलावे को हम हक़ीक़त मान बैठते है,
जो नहीं हैं क़िस्मत में उसे अपना मान बैठते है
गया, जो नहीं था अपना, उसके बारे में क्या जिरह करना
अब हक़ीक़त को ही अपनी तकदीर मान बैठे है,
ग़ज़ब देखे है ख़्वाब अपनी जिंदगी में, अपनी जिंदगी को ले के पर
अब जो जी रहे है अपनी जिंदगी तो जिंदगी की हक़ीक़त जान बैठे है,
तुम्हारी उम्र भले ही मुझसे ज्यादा हो ‘सावन’
क्या फर्क पड़ता है पर तुमसे ज्यादा जिंदगी में पानी छान बैठे है
नसीहत उम्र का मोहताज नहीं होती सावन
ये बात बड़ी मुद्दत के बाद हम भी मान बैठे है।
✒️ सावन
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