Monologue : शिमला और मेरी यादें
सफर का कुछ अपना एक मकसद होता है फिर वो क्यो ना जिंदगी का हो या यात्रा का, अभी शिमला सफर जारी है ये वो सफर है जो मेरी जिंदगी उस हिस्से का हिस्सा रहा है जब मैने अपने सपनो की दुनिया बसाने की सोचा था, खैर सपनों का क्या उनका तो हश्र ही या तो पुरे हो या फिर अधूरे यादें बन के रह जाते है,
जब मुझसे मिली वो तो हमारे सपने एक जैसे थे शिमला की हसीन वादियों के बीच ना मै ना ही तु बस हम हो और हमारी यादें बस इस सपने को पुरा होना हमारे अधूरे होने के बाद लिखा था,
आज मै हूँ ये शहर है, वो सहर भी है और चाय का एक प्याला भी है बस कुछ अधूरा है तो वो मै हूँ ये चाय का प्याला है और तेरे बिना गुजर रही शामें, बस तु होती तो इस ख्वाइश के अलावा और कोई और हसरत नही थी, तेरे से किया हर वादा अब पूरा कर रहा हूँ अकेला ही सही पर हमारा सफर तन्हा ही मै पुरा कर रहा हूँ
हा एक बात कहनी थी तेरे से, ये काश पढ पाये की ये शहर भी तेरी ही तरह खुबसुरत है, रातों को ऐसा लगता है मानो तारे ज़मीन पे उतर आये है,वैसे इस शहर को भी नही पता की कब ठंड से कांप जाए और कब धूप से नहा जाए, जैसे तेरे नखरे कब गुस्सा हो जाए कब खुश...
और अवारा बादलों से मुलाकातें ऐसे होता है जैसे वो तेरी ही दीदार के वास्ते तेरे आस पास भटक रहे हो और मुझे इससे तेरी ही तरह मुहब्बत है पर इस मुहब्बत का हश्र भी अधूरा ही है, इस बार तेरी तरह ये छोड नही जाएगा, इस बार मुझे जाना होगा, इसे छोड के फिर लौट के आने के वायदे के साथ पिछली मुहब्बत से और भी ज्यादा मुकम्मल इश्क के साथ तेरी यादों के साथ......
शिमला सफर
'सावन'

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