बतकही 2 : देहाती लड़का

बतकही

तो बात यही थी की दो सपनो के बीच अपनी जिनगी उलझ गयी थी ये हालत वहीं लौंडा समझ सकता है जो अपने इश्क़ और सपने के बीच लटका हो, और ये हालत उन 18 के लौंडो का होता है जब उ पहली बार कोई सपना देखते है या पहली बार किसी को पसंद करते है शायद ये दोनो पहला ही उनका आख़िरी होता है काहे की इसके बाद वो फिर कीसी का नहीं हो पाते है या फिर कोई और सपना नहीं देख पाते है, उनका दिल उसकी गवाही ही नहीं देता है, वइसे इ प्यार मेरा पहला नहीं था लेकिन वो सपना नीली वर्दी का अरे वही एयर फोर्स वाला वो मेरा पहला और आखिरी था आज तक दिल ने दोबारा उस फैसले पे पुनर्विचार किया ही नहीं, करता भी कैसे एक जिद्दी लौंडे का जिद्दी दिल जो ठहरा,

उसकों ना पाने का कसक आज भी इस कदर है कि सख्त दिल और सख्त लौंडा वाला टैग भी हमें रोने से नहीं रोक पाता आँख का कोई कोना भीग जाता ही है 

यही तो जिने की वजह थी जिसे क़िस्मत ने झटके के साथ मुझसे छीना और मै टुट गया ऐसे जैसे फिर कभी ना जूटना हो.....


क्रमश:

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