#कविता बज़्म नज़्म मुनासिब नहीं समझता : सावन मुनासिब नहीं समझता तुम्हे अब अपनी जिंदगी का हिस्सा मानने से पल भर का साथ होने से ’सावन’ लोग हमसफ़र नहीं हो जाते जिंदगी के सफर में मिलते, गुजरते, बिछड़ 15 जुलाई शेयर करें