मुनासिब नहीं समझता : सावन
मुनासिब नहीं समझता तुम्हे अब अपनी जिंदगी का हिस्सा मानने से
पल भर का साथ होने से ’सावन’ लोग हमसफ़र नहीं हो जाते
जिंदगी के सफर में मिलते, गुजरते, बिछड़ते है लोग
इस भीड़ के लोग कभी यादों का हिस्सा नहीं हो जाते है
तुम्हे याद भी रखा है तो महज तुम्हारे कारनामों से सावन
वरना हमसफ़र एक दूसरे को कभी धोखा नहीं देते है
तुम याद आओगे बेशक उम्र भर मुझे ये याद रखना
दग़ाबाज़ी के किस्सों में तुम सरेआम हो जाओगे
सावन
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