चाय टपरी

कभी कभी सोचता हूँ कि, लोग फालतू का पैसा, डिश टीवी वालों को न्यूज देखने के लिए देते है उससे बेहतर है आप किसी चाय की टपरी पे जा के बैठ जाए सुबह सुबह कड़क चाय के साथ कल का घटा, आज का घटा, और कल क्या घटेगा सबका समाचार वही दे देते है, अंतराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रादेशिक, मंडल, जिला, शहर, गांव तक का न्यूज लोगो के पास है,और आज के भांड पत्रकारों से ज्यादा पुख्ता जानकारी के साथ
 गांव के न्यूज एंकरों को पता है कि कौन किसके साथ भाग गया, कौन छेड़खानी के चक्कर पे सरेआम पीटा गया, किसको सरकारी नौकरी पैसे पे लगी, किसने मेहनत किया, किसका बेटा उसे नहीं मानता है हर बात का पुख्ता जानकारी, 
 जानते हो लोगो को, समाज को लगता है कि महिलाएं ही गलचौरन (बातचीत करना बड़े स्तर पे) करती है पर चाय के टपरी पे पहुंचो तो पता चलता है उनका तो स्तर बस एक मोहल्ले से दूसरे तक ही बतकही सीमित है पर चाय की टपरी पे बैठने वाले विधानसभा से लोकसभा, भारत के एक कोने से दूसरे कोने दुनिया के इस छोर से उस छोर तक की गलचौरन करते है।
खाली मोदी को, उस सठियाए ट्रंप को और पगलाए जिनपिंग को लगता है कि वो सब राजनीति करते है कभी पूर्वांचल की चाय की टपरी पे बैठे तो पता चलेगा कि उनके सीट का समीकरण इसी चाय की टपरी से बनता है।
खैर पियक्कड़ों की बात हो तो दारू और शराब वाले यूंही बदनाम है चाय वालों से ज्यादा नशेड़ी आप को कोई मिले तो आप बताना चाय के नशेड़ी एक दिन में 10 से 12 चाय पी जाते और इस बीच देश से ले के दुनिया तक की राजनीति कर लेते है, घर में पीने वाली महिलाएं पूरे मोहल्ले की और अपने सारे रिश्तेदारों तक की राजनीति कर लेती है 

खैर आज सुबह सुबह मतीरुख काका का निजामी फरमान सुनने के बाद समझ आया कि पूर्वांचल के चाय की टपरी दुनिया का लघु संसद का एक अहम हिस्सा है

खैर आप सभी को महादेव रहेगा दिन के आखिर चाय के साथ 

सावन

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