दिन और रात : श्वेता

रात और दिन 
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1. दिन धरती का रहस्यात्मक सौंदर्य है जबकि रात आकाश का l
2.दिन एक गीत है और रात इस गीत की सुर,ताल व ध्वनि है l
3. दिन मुखरित होता है जबकि रात मौन l
4.दिन कर्म का प्रतीक है और रात इस कर्म का मीठा फल l
5.दिन रात की कालिमा को अपने भीतर समेट लेता है जबकि रात दिन के ताप को अपने भीतर समेट लेती है l
6.दिन सगुण साकार ईश्वर रूप है जबकि रात ईश्वर का निर्गुण - निराकार रूप l
7.दिन एक शायर है और रात उसकी शायरी l
8.दिन सृजन है और रात इस सृजन की शक्ति है l
9.दिन एक प्रेमी है और रात इसकी प्रेमिका जिनका कभी संयोग नहीं होता और इसलिए शायद लौकिक जीवन में विरह को सर्वाधिक सुंदर होने की मान्यता मिली हुई है l
10. दिन का समस्त सौंदर्य और सम्मान रात से है और रात का दिन से l
11. दिन हमारा परिचय संसार से करवाता है और रात हमारा परिचय स्वयं से करवाती है l
12. दिन पिता समान है जो हमें पुरुषार्थ और ऊर्जा से भर देता है जबकि रात माँ के समान है जो पुरुषार्थ से थकी मांदी देह को स्नेह से पुचकारकर इसकी थकावट दूर करती है l
13.दिन दर्द को प्रज्वलित करता है और रात इस दर्द पर लगने वाला मरहम है l 
14. दिन उन सपनों का क्रियांवित रूप है जिन्हे हम रात को देखा करते हैं l
15.दिन अनंत जीव - जंतु और पेड़ - पौधों की अविरल धारा है जबकि रात अनंत ग्रह - नक्षत्रों की ! दोनों इक दूजे की क्रियाओं में हस्तक्षेप नहीं करते और अपनी ही सीमा और मर्यादा में रहते हैं l 

श्वेता 27/7/24 08:15pm

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