मै और मेरा किरदार

 सच कहूं तो हम वो थे जो शायद कोई नही बनना पसंद करता, हम थे सबकी कहानियों के वो किरदार जो बस तकलीफ़देह होता है, जिसकी जैसी कहानियां उतना ही बेरहम हमारा किरदार और ताज्जुब तब होता है लोगो को, जब लोग हमसे  हमारी कहानी के बारे मे पुछते है और हम बस मुस्कुरा के बिना कहे आगे बढ जाते है, ताकि हमारी एक और कहानी ना हो और, औरो की तरह उसमे हम ही परमेश्वर बने ना हो बाकि जैसो की तरह पर हमारे बारे मे पुछने वाले लोग मेरी चुप्पी को फिर से हमारा घमण्ड मान अपनी सोच से हमारे चरित्र का आकलन कर हमे उसी बेरहम किरदार का दर्जा देते है.....

पहले हमे बुरा लगता था पर हम अब आदती हो गये है किस किस से सवालात करते किस किस को जवाब देते खुद कि कहानी बताता 

खुद की मनगढंत कहानी मे परमेश्वर बनने से कही बेहतर है लोगो की कहानियों मे बेरहम किरदार बने जी ले जिसको होगी जरूरत वो आजमा हमे फिर अपनी कहानियों मे किरदार तो देगा ही परमेश्वर का या फिर बेरहम तकलीफ़देह का.......


'सावन'

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