तनहाई : सावन

 कभी कभी नींद आँखों से ओझल हो और उस वक्त जब उसकी जरूरत हो तो यकीन मानों उस वक्त सोचने को कई बाते रह जाती और उससे ज्यादा मलाल करने को वक्त ही वक्त, इतनी रात गये तक पढ भी लिया,  गानों को सुन भी लिया, अभी तक हर एक जागने वाले से उनका हाल चाल तक ले लिया अब कुछ भी नहीं बचा है करने को और कोई नहीं जगा है मेरे को सुनने को अब जो कुछ बचा है तो वो हूँ मै और ये रातें, और मलाल करने को बहुत सी बाते और याद करने को बहुत सी यादें, अब तो फोन भी बंद होने को है शायद इसके बिना और भी अकेले.......


सुनने को बात और समझने को हालात कोई नहीं है फिर भी.. 


हर बार इसी तरह तन्हाई मे खो जा रहा हूँ, 

करके याद उनको और पुरी रात जग रहा हूँ 


वो कहते थे तुम्हारे हर हालात मे मै साथ हूँ

आज वो कही सोये होंगे सुकून की नींद 


और इन रातों मे उनकी याद आयी और मैं

उनको याद कर के आज फिर जग रहा हूँ 


वास्ता नहीं था मेरा दूर तक ऐसे इन हालातों से 

पर कम्बख्त किया जब से इश्क़ हमने 


चैन खो कर अपना इन विरान रातों मे

इन बुरे हालातो का भी सामना कर रहा हूँ 


© सावन

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