चलो आज अपने दिल से ही बगावत की जाए,जिसे ये दिल खुदा समझता है उसकी शिकायत की जाए,उल्फत मोहब्बत

चलो आज अपने दिल से ही बगावत की जाए,
जिसे ये दिल खुदा समझता है उसकी शिकायत की जाए,

उल्फत मोहब्बत का दामन छोड़ देते हैं,
मयखाने से बाहर चलो अब तिजारत की जाए,

देख बुझ रहे हैं दिये गलतफहमी की हवाओं में,
कोई जरूरत नहीं है कि उनकी हिफाज़त की जाए,

मुददतों बाद तेरे दर पर खुशी खड़ी है चल उसका स्वागत किया जाए,
मेरे हबीब आख़िरी ही सही एक मुलाकात की जाए,

एक अरसे बाद मिले हो तुम इस तन्हाई में सोचती हूं क्यों न कुछ सवालात किये जायें,

जिस प्रेम को मेरे मुरली मनोहर इतना पाक छोड़ गए हो,
क्या जरूरत थी कि इसमें मिलावट की जाए,

वो मनहूस पल,वो मेरी गुस्ताखी तो बता जब तुझे लगा कि अब अर्चना से इजाजत ली जाए,

देख बिखर गया पूरा बगीचा एक तेरे मुँह मोड़ लेने से,
जाते जाते ये तो बताता जा यहां किन फूलों से सजावट की जाए।।
                                       अर्चना।

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