Ghazal - गजल

Ghazal - गज़ल 



तुम्हे है मुहब्बत तो इजहार करो,
मै खुदा नही जो तुम्हारी हर इबादत सुन सकु,
तुम्हे है चाहत तो तुम, उसे कबूल करों, 
मै तुम्हारा हूँ ये तुम महसूस करो,  
वक़्त दर वक़्त की बात है, 
आज तन्हा हूँ महफ़िल मे,
कल को किसी का इश्क हो जाऊ,
देर ना करो इजहार ए इश्क मे,
क्या पता कल किसी और का महबूब हो जाऊ
मेरी मुहब्बत का तकाजा ना देखों,
हमे मुकम्मल इश्क की तलाश है, 
चल सकूं जिसके साथ पुरी जिंदगी,
ऐसे इंसान की तलाश है
जो बांट सके मेरे दर्द और तन्हाई को,
वो इश्क मेरे लिए खास है.....

'सावन'

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