आधुनिकता के हजारों चांद के बीच वो मेरा चांद कहीं फीका न पड़ जाए...!

आधुनिकता के हजारों चांद के बीच वो मेरा चांद कहीं फीका न पड़ जाए,
बस यही ख़ामोशी.... मुझे मेरे घर के सभी दिए बुझाने को कहते हैं।
और तुम्हारा मुड़कर मेरी कलाई पकड़ लेना,
मेरे हर खामोशी, डर को भुला देता है।

टिप्पणियाँ

Advertisement

Contact Us

भेजें