आधुनिकता के हजारों चांद के बीच वो मेरा चांद कहीं फीका न पड़ जाए...! लेखक:Verma RaviPosted at10 अक्टूबर आधुनिकता के हजारों चांद के बीच वो मेरा चांद कहीं फीका न पड़ जाए,बस यही ख़ामोशी.... मुझे मेरे घर के सभी दिए बुझाने को कहते हैं।और तुम्हारा मुड़कर मेरी कलाई पकड़ लेना,मेरे हर खामोशी, डर को भुला देता है। टिप्पणियाँ
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