किसी ने पुछा......
किसी ने पूछा.......
किसी ने पूछा,
शायरी लिखनी है नियम बताइए,
हमने कहा मुहब्बत कीजिए ,
किसी एक से कीजिए,
दिल से कीजिए,और बेइंतहा कीजिए,
फिर वही शख्स ,
आपका दिल तोड़ेगा और,
तोड़ता जाएगा ,
जैसे-जैसे दिल टुटेगा,
आप खुद- ब -खुद शब्दों को ,
जोड़ना सीख जाएंगे,
बात शायरी की करते हैं,
यकीन मानिये ,
पूरी ग़ज़ल लिख जाएंगे,
शख्स घबराया ,
फिर हल्के से मुस्कुराया,
कहा सौदा थोड़ा महंगा है,
दिल का ही नहीं,
यहाँ तो जान का भी खतरा है,
क्या किसी एक के लिए कोई
दुनिया छोड़ देता है?
जो खुद को ही तोड़ दे,
उससे ही नाता जोड़ लेता है,
आखिर क्यु दिल की बाज़ी में,
हारना जरूरी है ?
क्यूँ किसी को चाहने के बाद,
खोना जरूरी है?
क्यूँ मुहब्बत मुक्कमल नहीं होती,
क्यूँ एक की चाहत,
दूसरे की जरूरत नहीं होती?
क्या कलमकारी इतनी पेचीदा है?
या फिर खुद के जज़्बातों को,
लिखने का हुनर ही संजीदा है ?
हमने कहा साहब खुद को सम्भालिए,
यूँ ही ना घबराइए,
किसी और की नजरो में,
पहले खुद को निहारिए,
किसी और की तलाश में,
खुद को भूल जाइए,
जब किसी और की खुशी में,
खुद मुस्कुरा दीजिये,
तो यकीन मानिये फिर
सारे सवाल खुद भूल जाइए,
बस जिंदगी के,
इतने से फलसफे हैं ,
उतरने से पहले शब्द,
कहीं दिल पर उतरते हैं,
इतनी सी बात है,
बस इसको समझ लीजिए ,
फिर जो चाहे वो रच डालिए,
गीत, ग़ज़ल, शायरी या फिर,
खुद को खुद के कलम से लिख डालिए।
करुणा कलिका✍
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