छोडो तुम क्या जानोगे... अमित
इबादत क्या है
छोड़ो तुम क्या जानोगे, तुम्हारे तो खुदा कई हैं, सजदे कई हैं,
चाहत क्या है
किसी के बिना मर जाना या किसी एक का होके रह जाना
रहने तो ,
छोड़ो तुम क्या जानोगे तुमने तो दिल्लगी की है,
आदत क्या है,
छोड़ो, ये तुमको मालूम नहीं है,
इस लफ्ज़ से तुम्हारा कोई वास्ता नहीं है
मोहब्बत क्या
रस्म ए उल्फत में मेहबूब के नाम से दिल धड़क जाना,
बेकरारी, बेताबी, बेचैनी का खजाना
उसके बिन सुकून ना आना,
बिन देखे रह न पाना,
खैर छोड़ो तुम क्या जानोगे
इस नाम की कोई शय
ना तुम्हारे दिल में थी
ना है, ना कभी रही है....
© अमित ठाकुर
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