#कविता, #नज़्म मेरा आगे बढ़ जाना वाजिब है : सावन अब उनके लिए मेरा कोई आख़िरी भी पैगाम नही है, गए जो छोड़ साथ मेरा, इसका अब अफ़सोस नहीं है अब जो याद आते हैं हमें वो, तो वजह है उनकी बेवफाई, वरना सच कहूं त 24 सितंबर शेयर करें
#इश्क़, #कविता मैने बदलते इश्क़ और जज़्बात को देखा :सावन सावन सावन करा शिद्दत से मुहब्बत मैने और फिर इश्क़ को अपने हिस्से मे मांग के देखा मिला नहीं जो मुकम्मल इश्क मेरा तो मैने, उसका शिद्दत से इंतज़ार कर के देख 30 अगस्त शेयर करें
#द, #हिन्दी कविता पुछते है लोग की...... सावन पुछते है लोग की, इतने दर्द मे मुस्कुरातें कैसे हो ? कैसे बताऊ दिल ए हाल की, अब मुझे दर्द नहीं होता, कुछ इस कदर झेला है सितम हमने अपनो का, गिर पडतें आखों स 06 फ़रवरी शेयर करें
#एहसास, #नज़्म अबकी मिलने आना तो : अमित अबकी मिलने आना तो जिम्मेदारियों से थोड़ा वक्त लेकर आना, अबकी आना तो अपने दामन से उनको झटक कर आना लगाना जिम्मेदारियों को गेटिस तुम खुली जुल्फ में आना, अबकी 30 जनवरी शेयर करें
#मुहब्बत, #हिन्दी कविता छोडो तुम क्या जानोगे... अमित इबादत क्या है छोड़ो तुम क्या जानोगे, तुम्हारे तो खुदा कई हैं, सजदे कई हैं, चाहत क्या है किसी के बिना मर जाना या किसी एक का होके रह जाना रहने तो , छोड़ो तुम 29 जनवरी शेयर करें
#ग़ज़ल - Ghazal, #हिन्दी कविता लोग हर मोड़ पर रुक रुक के संभलते क्यों है लोग हर मोड़ पर रुक-रुक के संभलते क्यों है, इतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यों है मैं ना जुगनू हूँ दिया हूँ ना कोई तारा हूँ रौशनी वाले मेरे नाम से ज 27 जनवरी शेयर करें
#कविता, #नज़्म यकिन नही होता की इतना बदल गया हूँ मै : सावन हर बार अपनी शख्सीयतें बदल बदल के थक गया हूँ मै हर एक के लिए चेहरे का नकाब बदल बदल के थक गया हूँ मै खुश रहे हर एक इंसान मुझसे ये सोच सोच के बदल गया हूँ म 12 मार्च शेयर करें
#हिन्दी कविता, #hindi poetry गुमनामी मे लिखता हूँ खामोशी अपनी...... 'सावन' तुम समझ रहे हो जैसा मुझको वैसे मेरे अब हालात नहीं है एक बंद कमरे मे सिमट गया हूँ मुझमे कोई अब जज़्बात नहीं है मुझे है सुकून देने लगी है खामोशीं अब शोर 13 नवंबर शेयर करें