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मेरा आगे बढ़ जाना वाजिब है : सावन

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मैने बदलते इश्क़ और जज़्बात को देखा :सावन

पुछते है लोग की...... सावन

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अबकी मिलने आना तो : अमित

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छोडो तुम क्या जानोगे... अमित

लोग हर मोड़ पर रुक रुक के संभलते क्यों है

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यकिन नही होता की इतना बदल गया हूँ मै : सावन

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गुमनामी मे लिखता हूँ खामोशी अपनी...... 'सावन'

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