पुछते है लोग की...... सावन
पुछते है लोग की,
इतने दर्द मे मुस्कुरातें कैसे हो ?
कैसे बताऊ दिल ए हाल की,
अब मुझे दर्द नहीं होता,
कुछ इस कदर झेला है
सितम हमने अपनो का,
गिर पडतें आखों से आँसू
पर हमें महसूस नही होता,
अब आती नही हमें
सूकुन कि नीदें बिस्तरों मे,
जिंदगी का सफर,
इतनी आसानी से पुरा नही होता
पुछते है लोग की,
इतने दर्द मे मुस्कुराते कैसे हो ?
कैसे बताऊ की,
मरे हुए को दर्द महसूस नही होता
✒ © सावन
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