अपनी यादों को यूँ ना उलझाओं जनाब : सावन
अपनी यादों को यूँ ना उलझाओं जनाब,
इश्क़ को इश्क़ की तरह निभाओं जनाब
जो है पास तुम्हारे उनको तो सम्हाल लो
गैरो की याद मे अपनो को ना भूलाओ जनाब
याद, दर्द और प्यार ये है महज तुम्हारे एहसास
इन एहसासों के लिए खुद को न सताओं जनाब
अब तो सुन लो सावन की आखिरी बात
जो तुम्हे छोड गया उसे भूल जाओं जनाब
'सावन'
टिप्पणियाँ