कई शाम के बाद एक सहर आया : सावन
कई शाम के बाद एक सहर आया
जब जिंदगी में वो आया तो फिर एक मोड आया
जमाने भर का सितम हम भूल गए जैसे
जो उसने आसमां भर की खुशियों का मोल लाया
अब जरूरत है उन खुशियों को सम्हालने की
जो मिला उसमें ही सुकून पाने की
दर्द का आलम ना पूछो साकी मुझसे
अब हालात है पुराने जख्मों को भूल जाने की
शिकायतें तो उम्र भर रही जिंदगी से
अब ना कोई इससे शिकवा करूंगा
जो मिल गया उसमें ही ढूंढ लूंगा सुकून मै
पर अब किसी से कोई शिकायत नहीं करूंगा
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