ज़माने भर ने नसीहतें दी : सावन
समझाए भी तो किसे हम
कोई समझना चाहता ही नहीं
दस्तूर ए हालात कुछ ऐसे हो गए है
की दिल अब किसी से कुछ चाहता ही नहीं
अगर जो मै ना करूं याद किसी को
यक़ीन मानो कोई मुझसे राब्ता करता ही नहीं
ज़माने की फ़ितरत समझ आने लगी है हमें
ये नाकामयाब और नाकामयाबी को अपनाता ही नहीं
जो है कामरान इस ज़माने में सावन
उसके अलावा किसी को ये ज़माना पहचानता ही नहीं।
© सावन
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