poetry : चलो आज फिर बैठ, फुर्सत मे हम बात करते है, एक दूसरे के दिये दर्दो, का हम हिसाब करते है
चलो आज फिर बैठ,
फुर्सत मे हम बात करते है,
एक दूसरे के दिये दर्दो,
का हम हिसाब करते है
अपने खुद के गुस्ताख़ीयों का,
हम इकबाल करते है
चलो आज फिर बैठ,
फुर्सत मे हम बात करते है,
जो तुम छोड़ गये हमें
हमारे हलातों पे क्या तुम्हे याद है
थी मेरी कुछ गुस्ताख़ी
ये हमें क़बूल है और हमे याद है
तुम ने मेरी गुस्ताख़ीयों की
इतना बड़ा सजा दिया
तुम से ही थी मेरी सच्ची मुहब्बत,
और तुमने ही मुझे दगा दिया
हाँ होती है हर रिश्तों में
थोडी बहुत नोंक झोंक
इसका ये मतलब तो नही की,
तुमने रिश्तों को ही भुला दिया
इस मतलबी लोगों मे, बस,
तुम से ही थी मेरी उम्मीद
और उस उम्मीद को तोड़,
तुमने मुझे सच मे भुला दिया
छोड़ो इन बातों को,
खैर ये तो रहे हमारे इल्जाम
पर सच कहों हमसे की,
याद आयी मेरी या फिर
हमारी यादों को भी,
रिश्तों की तरह तुमने भुला दिया
वो बातें, तुम्हारे वादें
कुछ सच भी था हमारे रिश्तों मे
या बस महज एक जुबानी थी
चलो तुम याद ना करोंमुझे मेरी यादों को
पर तुम भी भुल ना पाओंगे की
हमारी कोई कहानी थी.....
'सावन'
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