Poetry : शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं.......
शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं
उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं
विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं
कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं……………
कुछ नए अर्थों में पीर पुरानी हर बार लिखूँ मैं……..
इस दिल का उस दिल पर, उस दिल का किस दिल पर
कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा अधिकार लिखूँ मैं………
होठों की ख़ामोशी लिखूँ या अंतर की आवाज़ लिखूँ मैं…
अंजाम लिखूँ इश्क का या मुहब्बत का आगाज़ लिखूँ मैं
गीत लिखूँ मिलन के या जुदाई के अल्फाज़ लिखूँ मैं…
बिखरे हुए सुरों से कैसे कोई नया साज़ लिखूँ मैं……..
कजरे की धार लिखूँ या फूलों वाला हार लिखूँ मैं
लबों की शोखी लिखूँ या आँखों का इकरार लिखूँ मैं
इस रीते तन-मन से, अधूरे, अकेले खाली पन से
कैसे नवयौवन-मधुबन का सारा श्रृंगार लिखूँ मैं
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