#कविता, #नज़्म यकिन नही होता की इतना बदल गया हूँ मै : सावन हर बार अपनी शख्सीयतें बदल बदल के थक गया हूँ मै हर एक के लिए चेहरे का नकाब बदल बदल के थक गया हूँ मै खुश रहे हर एक इंसान मुझसे ये सोच सोच के बदल गया हूँ म 12 मार्च शेयर करें
#कविता, #नज़्म ये कहना ठीक नहीं होगा कि मेरे बाद मर जाओगी तुम - विनीत ये कहना ठीक नहीं होगा कि मेरे बाद मर जाओगी तुम, आशिक कई हैं तुम्हारे, किसी के घर तो जाओगी तुम, ये इत्तला थी मुझे कि चाहत तेरी म़हज दिखावा थी, मैं डूब गया जि 11 जून शेयर करें
#कविता, #नज़्म दिल में जो भावों से भरा समंदर है, क्या ये कौतुहल सिर्फ़ मेरे ही अन्दर है? - विनीत दिल में जो भावों से भरा समंदर है, क्या ये कौतुहल सिर्फ़ मेरे ही अन्दर है? क्या शब्दों को यूं जोड़ना नाकाफी सा है? ख़यालों की सुनामी को मन में दबा के रखना 04 जून शेयर करें
#कविता, #नज़्म चाँदनी रात है और जख़्म अभी ताजा है बात कुछ यूँ है की अब वो ना मेरा है.....'सावन' चाँदनी रात है और जख़्म अभी ताजा है बात कुछ यूँ है की अब वो ना मेरा है लाख कोशिशें की अपने रिश्तें को बचाने की पर फैसला उसका है की अब वो ना मेरा है हम हो 31 मई शेयर करें
#कविता, #नज़्म ख्वाबों में आता हर शख्स तू है, मेरी शायरी का हर ज़ख्म तू है....... storyteller vs जो ख्वाबों में आता वो शख्स तू है, मेरी शायरी का हर ज़ख्म तू है| तू मेरा तो नहीं, पर मुझमें शामिल मेरा अक्स तू है| उस डायरी के पन्नों में, दफ़न हुआ मेरा वक् 19 अप्रैल शेयर करें
#कविता, #नज़्म कभी-कभी मुझे लगता है मैं तो यूं ही हूं बस यूं ही...विकास कुमार चौबे कभी-कभी मुझे लगता है मैं तो यूं ही हूं बस यूं ही। . अब जब दिल में मेरे, तेरी धड़क नहीं। तुझे पाने की भी अब, कोई तड़प नहीं।। . मेरी आंखों में सपना, अब तेरा 07 मार्च शेयर करें
#कविता, #ज़िंदगी तमाम वादों की बुनियाद पर रिश्ता बनाकर, मैंनें लोगों को अक्सर मुकरते देखा है..... शम्भवी शिव तमाम वादों की बुनियाद पर रिश्ता बनाकर, मैंनें लोगों को अक्सर मुकरते देखा है। अच्छे वक्त में मुँह दिखाकर बुरे वक्त में नज़रें घुमा ली, मैंनें रिश्तों को इ 06 फ़रवरी शेयर करें
#कविता, #नज़्म Poetry : शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं....... शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं कैसे चंद लफ़्ज़ों में सार 19 दिसंबर शेयर करें
#कविता, #नज़्म एक नींद की तलाश है हमें एक सुकून की चाह है हमें..... किसी ने पुछा...... एक नींद की तलाश है हमें एक सुकून की चाह है हमें अब मजीद ख्वाहिशे नही है एक खुशी की तलाश है हमें बेशक दर्द बेहिसाब सा है लेकिन कोई शि 07 दिसंबर शेयर करें
#कविता, #नज़्म Poetry : कहाँ पर बोलना है और कहाँ पर बोल जाते हैं, जहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैं..... कहाँ पर बोलना है और कहाँ पर बोल जाते हैं। जहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैं।। कटा जब शीश सैनिक का तो हम खामोश रहते हैं। कटा एक सीन पिक्चर का तो सारे 12 अक्टूबर शेयर करें