पूछने वाले पूछा करते हैं, जिम्मेदार मेरे हाल का, अगर ले लूं कभी तुम्हारा नाम, तो क्या हो.... विकास कुमार चौबे
पूछने वाले पूछा करते हैं, जिम्मेदार मेरे हाल का।
अगर ले लूं कभी तुम्हारा नाम, तो क्या हो।।
याद ही होगा वो शाम, जब हम पहली बार मिले थे।
अगर फिर आ जाए वो शाम, तो क्या हो।।
यूं तो उंगलियां उठती ही होंगी, तुम पर मेरे बाद।
अगर फिर तुम्हारा हाथ लूं थाम, तो क्या हो।।
मुझे खौफ ना जमाने का है, ना परवाह लोगों की।
अगर ये तमाशा करूं सरे आम, तो क्या हो।।
या मैं भी ना भूलूं , वो अंदाज़ ए लहजा तुम्हारा।
अगर तुमसे लूं मै भी इंतकाम, तो क्या हो।।
किये थे खुदा के लिए, जो सजदे और नमाजे तुमने
अगर एक पल में हो जाए हराम, तो क्या हो।।
✒ विकास कुमार चौबे
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