यकिन नही होता की इतना बदल गया हूँ मै : सावन
हर बार अपनी शख्सीयतें
बदल बदल के थक गया हूँ मै
हर एक के लिए चेहरे का नकाब
बदल बदल के थक गया हूँ मै
खुश रहे हर एक इंसान मुझसे
ये सोच सोच के बदल गया हूँ मै
रहता हूँ बेइंतहा दर्द मे फिर भी
खुश हूँ ऐसा दिखावा कर के थक गया हूँ मै
अपना ख्याल तो आज कल
मै खुद का भी नही रख पाता
लेकिन लोगो के ख्यालातों को
सोच सोच के बदल गया हूँ मै
आइने मे अब जब कभी देखता हूँ
अपना ही इतना नकाबपोश चेहरा
यकीन नहीं होता खुद पे की अब
इतना बदल गया हूँ मै ......
'सावन'
टिप्पणियाँ