जिन सवालों का वजह मै कभी था ही नही, अक्सर मै अब उन सवालों से बचने लगा हूँ - सावन

जिन सवालों का वजह मै कभी था ही नही
अक्सर मै अब उन सवालों से बचने लगा हूँ 

जीस भीड ने हमे दरिंदा बनाया अब उस
नकाबपोश भरी भीड़ से डरने लगा हूँ 

इन उजालों मे जो मर सा गया था मै 
अंधेरी रातों मे फिर से जीने लगा हूँ 

जख़्म की आदत सी हो गयी है हमें, 
डरता नही अब जिस्म पे पडें घावों से 

है तो महज ये जिस्म के घाव ही ना 
मै दिल पे पडने वाली नासूरों से डरने लगा हूँ 

अब मुस्कुराया नही जा रहा वो झूठी मुस्कान 
शायद, अब भरी महफिल मे भी रोने लगा हूँ

ना किया कभी अपनी खुशियों की कद्र हमने 
जो कल तक थी मेरे चौखट पे बाहें फैलायी

अब जो हूँ दर्दों से सराबोर मै इस कदर की
आज मै उन ख़ुशीयों के लिए तरसने लगा हूँ 

'सावन'


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